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क्षितिज के उस पार: मानवता की कहानियाँ – जब कहानियाँ इंसानियत को फिर से महसूस कराती हैं

Author: Dr Arun Kumar
Publisher: Avika Publisher
Rating: ★★★★☆ (4/5)

"कुछ किताबें पढ़ी नहीं जातीं, महसूस की जाती हैं। 'क्षितिज के उस पार: मानवता की कहानियाँ' ऐसी ही एक किताब है, जो खत्म होने के बाद भी अपने पात्रों और भावनाओं के साथ आपके भीतर कहीं ठहर जाती है।"




आज के दौर में कहानी-साहित्य लगातार बदल रहा है। रहस्य, अपराध, मनोवैज्ञानिक थ्रिलर और प्रयोगधर्मी लेखन पाठकों को आकर्षित कर रहे हैं। ऐसे समय में डॉ. अरुण कुमार अपनी पुस्तक 'क्षितिज के उस पार: मानवता की कहानियाँ' के साथ बिल्कुल अलग दिशा में चलते हैं।

यहाँ न बड़े ट्विस्ट हैं, न सनसनी पैदा करने की कोशिश। यहाँ सिर्फ़ इंसान हैं—उनकी खुशियाँ, तकलीफें, रिश्ते और भीतर बची हुई संवेदनाएँ।


पुस्तक के शुरुआती पन्नों में ही लेखक यह साफ़ कर देते हैं कि ये कहानियाँ किसी एक समाज, वर्ग या विचारधारा की नहीं हैं। ये उन पलों की कहानियाँ हैं, जब इंसान अपनी परिस्थितियों से बड़ा बन जाता है। शायद यही इस पूरे संग्रह की सबसे खूबसूरत बात है।


जब संवेदनाएँ कहानी से बड़ी हो जाती हैं


पहली कहानी 'माँ का मनीऑर्डर' पढ़ते हुए शायद ही कोई ऐसा पाठक होगा जिसे अपनी माँ की याद न आए। महामारी के दौर की पृष्ठभूमि पर लिखी गई यह कहानी बहुत सादे शब्दों में इतना गहरा असर छोड़ती है कि अंत तक पहुँचते-पहुँचते आँखें नम होना स्वाभाविक लगता है।


यह कहानी बताती है कि माँ के लिए पैसे कभी सिर्फ़ पैसे नहीं होते, वे उसके प्रेम का दूसरा नाम होते हैं।


इसके बाद 'मशीन मदर' बिल्कुल अलग दुनिया में ले जाती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य की कल्पना के बीच लेखक एक बेहद सरल लेकिन गहरा सवाल पूछते हैं—क्या तकनीक कभी माँ की ममता की जगह ले सकती है? कहानी विज्ञान और भावनाओं के बीच एक दिलचस्प पुल बनाती है।


'पेड़ की छाँव', 'वार्ड नंबर 17', 'अब्बू', 'तवायफ़ की शादी' जैसी कहानियाँ भी अलग-अलग विषयों पर होते हुए अंततः एक ही बात कहती हैं—इंसानियत अभी भी ज़िंदा है, बस उसे देखने की नज़र चाहिए।

इस संग्रह की सबसे बड़ी ताकत, इस पुस्तक की सबसे बड़ी खूबी, इसकी भाषा है। डॉ. अरुण कुमार कठिन शब्दों या साहित्यिक प्रदर्शन से बचते हैं। उनकी भाषा सहज है, बोलचाल के करीब है और इसी वजह से कहानी सीधे पाठक के दिल तक पहुँचती है।


दूसरी बात, हर कहानी का विषय अलग है। कहीं माँ-बेटे का रिश्ता है, कहीं अस्पताल के वार्ड में जन्म लेती उम्मीद, कहीं धर्म से ऊपर उठता अपनापन, तो कहीं भविष्य की दुनिया में खोती हुई इंसानियत। यह विविधता पुस्तक को एकरस नहीं होने देती।


सबसे अच्छी बात यह लगी कि लेखक अपने पात्रों को असाधारण बनाने की कोशिश नहीं करते। वे बिल्कुल आम लोग हैं, और शायद इसी वजह से असली लगते हैं।
जहाँ थोड़ी और गहराई आ सकती थी

हालाँकि, पुस्तक पूरी तरह परिपूर्ण नहीं है।

कुछ कहानियाँ अपने संदेश को बहुत स्पष्ट शब्दों में कह देती हैं। कई जगह लगा कि लेखक पाठक पर थोड़ा और भरोसा कर सकते थे। अगर निष्कर्ष पाठक पर छोड़ दिए जाते, तो कई कहानियों का असर और भी गहरा हो सकता था।

इसी तरह कुछ कथानक अनुमानित भी महसूस होते हैं। कहानी कहाँ पहुँचेगी, इसका अंदाज़ा पहले ही लग जाता है। कुछ पात्रों के मनोवैज्ञानिक पक्ष को थोड़ा और विस्तार मिलता, तो वे लंबे समय तक याद रहते।

लेकिन यह कमियाँ पुस्तक के मूल उद्देश्य को कमज़ोर नहीं करतीं।


अंतिम बात
'क्षितिज के उस पार: मानवता की कहानियाँ' तेज़ रफ्तार मनोरंजन नहीं देती। यह आपको रुकने, सोचने और अपने आसपास मौजूद लोगों को थोड़ी अलग नज़र से देखने के लिए प्रेरित करती है।

यह संग्रह शायद आपको हर कहानी में चौंकाए नहीं, लेकिन कई कहानियों में भीतर तक छू ज़रूर जाएगा। आज के समय में, जब संवेदनशील होना धीरे-धीरे दुर्लभ होता जा रहा है, ऐसी किताबें सिर्फ़ साहित्य नहीं रह जातीं—वे हमें इंसान बने रहने की याद दिलाती हैं।


Neel Writes Verdict
'क्षितिज के उस पार: मानवता की कहानियाँ' उन पाठकों के लिए है जो कहानी में सिर्फ़ घटनाएँ नहीं, भावनाएँ तलाशते हैं। अगर आपको प्रेमचंद, शिवानी, फणीश्वरनाथ 'रेणु' या मानवीय सरोकारों से जुड़ा साहित्य पसंद है, तो यह संग्रह आपको निराश नहीं करेगा।

इसमें हर कहानी उत्कृष्ट नहीं है, लेकिन अधिकांश कहानियाँ अपने उद्देश्य में सफल हैं और पढ़ने के बाद देर तक आपके भीतर बनी रहती हैं।

⭐⭐⭐⭐☆ (4/5)

"यह किताब आपको यह नहीं सिखाती कि अच्छा इंसान कैसे बनना है; यह सिर्फ़ याद दिलाती है कि आपके भीतर का इंसान अभी भी ज़िंदा है।"


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