मेरे देश की धरती सोना उगले: बैलपोळा का महत्व
- Neel Writes

- Aug 23, 2025
- 2 min read
Updated: Sep 10, 2025
भारतीय संस्कृति और कृषि
भारतीय संस्कृति में कृषि को अत्यधिक महत्व दिया गया है। भारत एक कृषिप्रधान देश है। यहाँ, किसान को देश का कणा माना जाता है। सभी जीवों को जीवित रहने के लिए अनाज की आवश्यकता होती है। किसान प्राचीन काल से बैल की मदद से कृषि करता आया है। बैल कृषि के विभिन्न कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नांगरणी, कोळपणी, पेरणी, और धान्य को घर या बाजार तक पहुँचाने में बैल की सहायता अमूल्य होती है। किसान अपने श्रम से खेतों को संपन्न बनाता है, धान्य उगाता है, और समाज को अन्न प्रदान करता है। इसलिए, बैल को किसान का “जीवनसाथी” कहा जाता है।

बैलपोळा का उत्सव
बैलपोळा का उत्सव बैल के श्रम का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है। यह उत्सव महाराष्ट्र सहित अन्य कृषि प्रधान राज्यों में मनाया जाता है। कुछ राज्यों में इसे "बेंदूर" के नाम से जाना जाता है। गर्मियों में कृषि कार्यों का बोझ बैल पर होता है। बारिश के मौसम में पेरणी का काम भी बढ़ जाता है। इसलिए, बैल को विश्राम देने के लिए यह उत्सव मनाना एक परंपरा बन गई है। 'श्रावण पोळा' का उत्सव श्रावण महीने की अंतिम अमावस्या को मनाया जाता है। इसके बाद भाद्रपद अमावस्या को 'भाद्रपदी पोळा' भी मनाया जाता है।
बैल की सजावट और पूजा
सुबह से ही किसान बैल की अच्छी देखभाल करते हैं। उन्हें स्नान कराकर उनके शरीर पर तेल लगाया जाता है। बैल के शिंगों को सजाने के लिए उन्हें चमकाया जाता है। रंग-बिरंगे कपड़े और फूलों की माला से बैल को सजाया जाता है। बैल को पूजा करके उन्हें गोड धान्य का नैवेद्य अर्पित किया जाता है। विशेष रूप से, उन्हें तूप, गूळ, और अन्य खाद्य पदार्थ दिए जाते हैं। गांव-गांव में बैल की मिरवणूक निकाली जाती है। लोग ढोल-ताशों की आवाज में नाचते और गाते हैं। यह उत्सव गांव में खुशी और उल्लास फैलाता है।
बैल और किसान का संबंध
बैल और किसान के बीच एक गहरा संबंध होता है। बैल शांत और प्रेमपूर्ण प्राणी होते हैं। बैलपोळा के दिन, किसान अच्छे कपड़े पहनकर बैल की पूजा करते हैं। इस दिन का महत्व केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह किसान और बैल के बीच के आत्मीयता के बंधन को दर्शाता है। आज के यांत्रिकीकरण के युग में भी बैल का महत्व कम नहीं हुआ है। बैल की पूजा करना मानव और प्राणी के बीच के सहजीवन का प्रतीक है। यह कृतज्ञता की भावना को जागृत करता है।
बैलपोळा का सांस्कृतिक महत्व
बैलपोळा का उत्सव केवल एक प्राणी पूजा नहीं है, बल्कि यह किसान, बैल, और प्रकृति के बीच के संबंध को प्रदर्शित करता है। किसान का जीवन बैल के बिना अधूरा है। इसलिए, बैल के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करना हमारी जिम्मेदारी है। यह उत्सव परंपरा से आज भी जीवित है। बैल और किसान को हमेशा सुखी दिन मिलें। इस विशेष दिन पर बैल के कानों में डीजे का शोर नहीं होना चाहिए, ताकि वे भी इस उत्सव का आनंद ले सकें।
लेखक - डॉ. प्रवीण डुंबरे,
शिवजन्मभूमी, ओतूर (पुणे)
9766550643




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